#meditation
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श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में सच्चिदानंद घन ब्रह्म (परम अक्षर ब्रह्म) अर्थात पूर्ण परमात्मा की भक्ति के लिए "ओम् तत् सत्" इस तीन मंत्र के जाप (सुमिरन) का निर्देश किया गया है। जिसके सुमिरन की तीन प्रकार की विधि बताई गई है।
श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में सच्चिदानंद घन ब्रह्म (परम अक्षर ब्रह्म) अर्थात पूर्ण परमात्मा की भक्ति के लिए "ओम् तत् सत्" इस तीन मंत्र के जाप (सुमिरन) का निर्देश किया गया है। जिसके सुमिरन की तीन प्रकार की विधि बताई गई है।
MEDITATION
Srimad Bhagavad Gita
Gita chapter 3 Shlok 5 to 9
A foolish person, who forcefully controlling all the senses of action i.e. by sitting in one place, meditates, he is called a hypocrite
.
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Gita chapter 3 Shlok 5 to 9
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मेडिटेशन करने से शारीरिक सुख मिल सकता है लेकिन आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल सकता है। परमात्मा से साक्षात्कार करने वाले संतों ने सहज समाधि बताई है जिसमें चलते–फिरते, उठते–बैठते परमात्मा का नाम सिमरन करना होता है।
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मेडिटेशन करने से शारीरिक सुख मिल सकता है लेकिन आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल सकता है। परमात्मा से साक्षात्कार करने वाले संतों ने सहज समाधि बताई है जिसमें चलते–फिरते, उठते–बैठते परमात्मा का नाम सिमरन करना होता है।
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शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता है। इस विषय में श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा गया है कि शास्त्रविधि को त्यागकर जो व्यक्ति मनमाना आचरण करता है उसे न कोई लाभ होता है, न सुख प्राप्त होता है और न ही परमगति यानी मोक्ष मिलता है।
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शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता है। इस विषय में श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा गया है कि शास्त्रविधि को त्यागकर जो व्यक्ति मनमाना आचरण करता है उसे न कोई लाभ होता है, न सुख प्राप्त होता है और न ही परमगति यानी मोक्ष मिलता है।
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हठयोग संतमत में नहीं बताया गया है। हठयोग करने से परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती है। संतमत में कबीर साहिब जी ने सहज समाधि बताई है। जिसमें उन्होंने कहा है
नाम उठत, नाम बैठत, नाम सोवत जाग रे ।
नाम खाते, नाम पीते, नाम सेती लाग रे ।।
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हठयोग संतमत में नहीं बताया गया है। हठयोग करने से परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती है। संतमत में कबीर साहिब जी ने सहज समाधि बताई है। जिसमें उन्होंने कहा है
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नाम खाते, नाम पीते, नाम सेती लाग रे ।।
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नाम उठत, नाम बैठत, नाम सोवत जाग रे ।
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नाम उठत, नाम बैठत, नाम सोवत जाग रे ।
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Take initiation from complete Guru Sant Rampal Ji Maharaj and then contemplating on the qualities of the Supreme God is meditation. This is the key to success in human life.
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One cannot attain peace by doing Meditation & keeping Fasts.
Fasting is against holy scriptures.
God is pleased by true worship.
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Fasting is against holy scriptures.
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हठयोग से न तो परमात्मा मिलता है और न ही जन्म-मृत्यु से मुक्ति मिलती है। बल्कि पवित्र गीता अध्याय 17 श्लोक 5 व 6 में मनमाने घोर तप (हठयोग) करने वालों को गीता ज्ञान दाता ने अज्ञानी, आसुर स्वभाव वाले बताया है।
तत्वदर्शी संत से सत्यनाम और सारनाम प्राप्त करके जोकि सच्चे नाम मंत्र की ओर संकेत करते हैं और मर्यादा में रहकर सतभक्ति करने से पूर्ण मोक्ष प्राप्त होगा।
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हठयोग से न तो परमात्मा मिलता है और न ही जन्म-मृत्यु से मुक्ति मिलती है। बल्कि पवित्र गीता अध्याय 17 श्लोक 5 व 6 में मनमाने घोर तप (हठयोग) करने वालों को गीता ज्ञान दाता ने अज्ञानी, आसुर स्वभाव वाले बताया है।
तत्वदर्शी संत से सत्यनाम और सारनाम प्राप्त करके जोकि सच्चे नाम मंत्र की ओर संकेत करते हैं और मर्यादा में रहकर सतभक्ति करने से पूर्ण मोक्ष प्राप्त होगा।
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मेडिटेशन की सही विधि क्या है?
मेडिटेशन (ध्यान / प्रभु के नाम) की सही विधि कबीर साहेब ने बताई है:-
नाम उठत नाम बैठत, नाम सोवत जागवे।
नाम खाते नाम पीते, नाम सेती लागवे।।
अर्थात परमात्मा का ध्यान/नाम सुमिरन करते रहना चाहिये।
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मेडिटेशन की सही विधि क्या है?
मेडिटेशन (ध्यान / प्रभु के नाम) की सही विधि कबीर साहेब ने बताई है:-
नाम उठत नाम बैठत, नाम सोवत जागवे।
नाम खाते नाम पीते, नाम सेती लागवे।।
अर्थात परमात्मा का ध्यान/नाम सुमिरन करते रहना चाहिये।
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